तमिलनाडु के खनिजों से मंगल जैसे वातावरण समझने की नई राह
केरल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर मिले जलयुक्त सल्फेट खनिजों का अध्ययन किया; यह मंगल पर जीवन मिलने का प्रमाण नहीं है।

केरल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली के अटाकामा रेगिस्तान में मिले खनिजों के आधार पर मंगल जैसे भूवैज्ञानिक वातावरण का अध्ययन किया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 16 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी।
कहाँ मिले कौन से खनिज
तमिलनाडु के नेवेली में मेलेंटेराइट की पहचान हुई। तिरुचिरापल्ली के बीहड़ों और अटाकामा में जिप्सम मिला। दोनों जलयुक्त सल्फेट हैं, इसलिए चट्टानों और पानी की अंतःक्रिया को समझने में मदद करते हैं।
केरल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में डीएसटी-एफआईएसटी समर्थित लेजर रमन स्पेक्ट्रोमीटर से खनिजों के विशिष्ट संकेतों की जांच की गई। जिप्सम पुराने जलीय वातावरण के संकेत संजो सकता है, जबकि मेलेंटेराइट अल्पकालिक नम और अम्लीय परिस्थितियों से जुड़ी प्रक्रियाएं समझने में उपयोगी है।
मंगल की खोज के लिए पृथ्वी पर अध्ययन
ऐसे स्थलों को अनुरूप उदाहरण के रूप में उपयोग किया जाता है। इससे वैज्ञानिक उन परिस्थितियों की तुलना कर सकते हैं जिनमें खनिज बनते हैं और संरक्षित रहते हैं।
यह खोज मंगल पर जीवन मिलने या वहाँ से नए नमूने लाने की घोषणा नहीं है। इसकी उपयोगिता भविष्य के ग्रह अभियानों के लिए उपयुक्त संकेत और अध्ययन स्थल समझने में है।
स्रोत
- भारतीय वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के समान कुछ स्थलों की पहचान की — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय / PIB