08/10/2026
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ओडिशा बंद से बीजद ने बनाई दूरी, खनन कानून और किताबों पर विरोध कायम

8 अक्टूबर के ओडिशा बंद से बीजद ने दूरी बनाई है। पार्टी ने कहा कि वह न समर्थन करेगी, न विरोध; खनन कानून और पाठ्यपुस्तकों पर उसका विरोध जारी है।

क्रीम कागज के कोलाज में ओडिशा विधानसभा के सत्र की पुरानी तस्वीर, राज्य की रूपरेखा और मतदान-पेटी का रेखाचित्र
चित्रात्मक संपादकीय कोलाज। फोटो: Digital Presidential Library, Rashtrapati Bhavan, ओडिशा विधानसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 27 नवंबर 2025 के संबोधन का अभिलेखीय दृश्य; Government Open Data License–India (GODL-India), स्रोत फोटो, लाइसेंस। कोलाज के लिए फोटो को रूपांतरित किया गया है; यह आज के बंद या प्रदर्शन का दृश्य नहीं है।

8 अक्टूबर को ओडिशा में कांग्रेस-नेतृत्व वाले विपक्षी दलों ने 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है। इसी बीच राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने स्पष्ट किया कि वह बंद का न समर्थन करेगी, न विरोध। बीजद मीडिया समन्वयक लेनिन मोहंती ने कहा कि पार्टी भाजपा और कांग्रेस—दोनों से समान दूरी रखते हुए ओडिशा के लोगों के हितों पर अपना फैसला करेगी। दैनिक जागरण की हिंदी रिपोर्ट और ThePrint Hindi की पीटीआई रिपोर्ट में उनके बयान का विवरण है।

मुख्य बातें

  • बीजद ने 8 अक्टूबर के राज्यव्यापी बंद से खुद को अलग रखा है।
  • दिल्ली में SIR पर विपक्षी प्रदर्शन में शामिल होना, बीजद के मुताबिक, राज्य में कांग्रेस गठबंधन का साथ देने के बराबर नहीं है।
  • खनन कानून और पाठ्यपुस्तकों पर पार्टी का विरोध जारी है; बंद के आयोजकों ने अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं को छूट देने की बात कही है।

दिल्ली में साथ, ओडिशा में अलग रुख

बीजद नेताओं ने एक दिन पहले दिल्ली में विपक्षी दलों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। ओडिशा की स्थानीय समाचार संस्था OdishaBytes ने भी रिपोर्ट किया कि बीजद ने दिल्ली की कार्रवाई को मुद्दे-विशेष पर भागीदारी बताया और राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति दोहराई।

इसलिए बीजद का बंद से अलग रहना उसके मुद्दों से पूरी तरह पीछे हटना नहीं है। मोहंती ने कहा कि पार्टी संशोधित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2026 और कथित त्रुटियों वाली स्कूली पुस्तकों का स्वतंत्र रूप से विरोध करती रही है। किताबों में त्रुटियों की बात विपक्षी दलों और बीजद के दावों के रूप में सामने आई है; इस खबर में इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित निष्कर्ष नहीं माना गया है।

बंद के मुद्दे और जरूरी सेवाएं

ओडिशा में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बंद बुलाया है। उनके बताए मुद्दों में संशोधित MMDR कानून वापस लेने, SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, राज्य के स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत की मांग शामिल है। ये आयोजकों की मांगें हैं, स्थापित तथ्य नहीं।

8 अक्टूबर के OrissaPOST अपडेट के मुताबिक, आयोजकों ने अस्पताल, एम्बुलेंस, अग्निशमन, दवा की दुकानों, दूध की आपूर्ति और परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों को बंद से छूट देने के निर्देश दिए। यह आयोजकों का घोषित दिशानिर्देश है; इससे राज्य भर में सेवाओं की वास्तविक स्थिति की पुष्टि नहीं होती।

राज्य भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने कहा है कि बंद का आम लोगों पर असर नहीं पड़ेगा, जबकि बंद के आयोजक इसे शांतिपूर्ण तरीके से सफल बनाने की अपील कर रहे हैं। अभी उपलब्ध रिपोर्टों में बीजद की स्पष्ट स्थिति और बंद के निर्देश दर्ज हैं; पूरे राज्य में बंद कितना असरदार रहा, इस पर यहां कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा।

स्रोत

स्रोत

  1. ओडिशा बंद से BJD का किनारा: न NDA के साथ, न 'INDIA' का दिया साथ — दैनिक जागरण
  2. ‘इंडिया’ में शामिल दलों का ओडिशा बंद कल, बीजद ने किया किनारा — ThePrint Hindi (भाषा/पीटीआई)
  3. A Day After Delhi Protest, BJD Distances Itself From INDIA Bloc’s Odisha Bandh — OdishaBytes
  4. INDIA bloc’s 12-hour Odisha bandh today — OrissaPOST